असम में बाढ़ से प्रभावित स्कूलों को संवारने की मुहिम, छात्रों के लिए आर्थिक और शैक्षणिक सहायता का ऐलान

गुवाहाटी: असम सरकार ने हाल ही में आई बाढ़ से प्रभावित शिक्षण संस्थानों को फिर से व्यवस्थित करने के लिए व्यापक अभियान शुरू किया है। राज्य के शिक्षा मंत्री रानोज पेगू ने बाढ़ प्रभावित छात्रों के लिए आर्थिक सहायता, स्कूलों की मरम्मत, नई पाठ्यपुस्तकों, यूनिफॉर्म और आवश्यक शैक्षणिक दस्तावेज़ उपलब्ध कराने की घोषणा की है।

मंगलवार को जोरहाट जिला आयुक्त कार्यालय में आयोजित समीक्षा बैठक में शिक्षा मंत्री ने अधिकारियों को प्रत्येक संस्थान के नुकसान का विस्तृत आकलन तैयार करने और मरम्मत कार्य में तेजी लाने के निर्देश दिए, ताकि स्कूलों में जल्द से जल्द पढ़ाई फिर से शुरू हो सके।

360 शिक्षण संस्थान बाढ़ से प्रभावित

समीक्षा बैठक में अधिकारियों ने बताया कि केवल जोरहाट जिले में ही 360 शिक्षण संस्थान बाढ़ से प्रभावित हुए हैं। इनमें 125 स्कूल और कॉलेज ऐसे हैं, जिन्हें गंभीर क्षति पहुंची है।

बैठक में स्कूल भवनों, कक्षाओं, फर्नीचर, पुस्तकालयों, कंप्यूटर प्रयोगशालाओं और शिक्षण सामग्री को हुए नुकसान का आकलन किया गया। साथ ही सामान्य शैक्षणिक गतिविधियों को जल्द बहाल करने की रणनीति पर भी चर्चा हुई।

शिक्षा मंत्री रानोज पेगू ने बताया कि जोरहाट, शिवसागर, चराइदेव और गोलाघाट जिलों में शिक्षण संस्थानों को सबसे अधिक नुकसान हुआ है।

छात्रों को मिलेगी आर्थिक और शैक्षणिक सहायता

बाढ़ के कारण कई स्कूलों की लाइब्रेरी, कंप्यूटर लैब, फर्नीचर, पाठ्यपुस्तकें और महत्वपूर्ण शैक्षणिक रिकॉर्ड नष्ट हो गए। इसके अलावा बड़ी संख्या में छात्रों की किताबें, यूनिफॉर्म और पढ़ाई से जुड़ी अन्य सामग्री भी खराब हो गई।

रानोज पेगू ने कहा कि प्रभावित छात्रों को पहले ही नई पाठ्यपुस्तकें और यूनिफॉर्म उपलब्ध कराई जा चुकी हैं। सरकार अब ऐसे छात्रों को एकमुश्त आर्थिक सहायता देने की संभावना पर भी विचार कर रही है।

उन्होंने यह भी बताया कि जिन छात्रों के महत्वपूर्ण शैक्षणिक दस्तावेज़ बाढ़ में नष्ट हो गए हैं, उन्हें उनके स्थान पर नए दस्तावेज़ निःशुल्क उपलब्ध कराए जाएंगे।

प्रत्येक प्रभावित स्कूल को 2 लाख रुपये की मंजूरी

शिक्षा मंत्री ने जानकारी दी कि मुख्यमंत्री ने पहले ही प्रत्येक प्रभावित स्कूल के लिए 2 लाख रुपये की सहायता राशि स्वीकृत कर दी है।

हालांकि, उन्होंने स्वीकार किया कि जिन शिक्षण संस्थानों को अधिक नुकसान पहुंचा है, उनके पुनर्निर्माण और मरम्मत के लिए अतिरिक्त वित्तीय सहायता की आवश्यकता होगी।

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