🗓️ Patna, October 11, 2025
बिहार की राजनीति में हलचल बढ़ गई है क्योंकि प्रशांत किशोर ने अपनी नजरें राघोपुर पर टिकाई हैं — वह सीट जो लंबे समय से RJD के तेजस्वी यादव का गढ़ रही है। यह संकेत है कि आगामी विधानसभा चुनाव में यहाँ एक संभावित हाईवोल्टेज मुकाबला देखने को मिल सकता है।
जन सुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर इस सप्ताह राघोपुर पहुंचे और एक अभियान की शुरुआत की, जिसने राजनीतिक हलकों में हलचल मचा दी। किशोर ने कहा कि अगर वह राघोपुर से चुनाव लड़ते हैं, तो तेजस्वी यादव का हाल वही हो सकता है जो 2019 में राहुल गांधी का अमेठी में हुआ था — यानी अपने गढ़ में हार का सामना करना पड़ सकता है। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि तेजस्वी को अपने राजनीतिक किले की रक्षा के लिए दो सीटों से चुनाव लड़ना पड़ सकता है।
🏛️ तेजस्वी यादव की तैयारी
तेजस्वी यादव अपनी विरासत और पार्टी की मजबूती पर भरोसा रखते हुए राघोपुर में अपना आधार मजबूत करने की योजना बना रहे हैं। यह सीट पहले उनके माता-पिता, लालू प्रसाद यादव और राबड़ी देवी के अधीन थी, और तेजस्वी के पास अब भी समर्थक वोट बैंक और संगठन की पूरी ताकत मौजूद है।
🔍 राजनीतिक विश्लेषण
विशेषज्ञों का कहना है कि किशोर की एंट्री इस मुकाबले को तीन-तरफा संघर्ष में बदल सकती है, जहाँ वोटों का बंटवारा और गठबंधन की रणनीतियाँ जीत का फैसला कर सकती हैं।
साथ ही, RJD ने तेजस्वी यादव को फूलपरास सीट से भी चुनाव लड़ाने की रणनीति अपनाई है ताकि पार्टी का जनाधार बढ़ सके और उनका मुख्य गढ़ सुरक्षित रहे।
⚡ निष्कर्ष
जैसे-जैसे चुनाव की तारीख करीब आ रही है, सबकी निगाहें इस पर हैं कि क्या प्रशांत किशोर राघोपुर में तेजस्वी के खिलाफ formally उतरेंगे, और क्या इस सीट पर दशकों में सबसे चुनौतीपूर्ण मुकाबला देखने को मिलेगा।
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