व्हीलचेयर पर पहुंचीं रूपी सोरेन तो मंच से उतर आईं राष्ट्रपति, शिबू सोरेन को मिला पद्म भूषण
नई दिल्ली/रांची। झारखंड मुक्ति मोर्चा के संस्थापक और झारखंड आंदोलन के प्रमुख नेता शिबू सोरेन को मरणोपरांत पद्म भूषण से सम्मानित किया गया। मंगलवार शाम राष्ट्रपति भवन में आयोजित समारोह में उनकी पत्नी रूपी सोरेन ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के हाथों यह सम्मान ग्रहण किया।
समारोह के दौरान एक भावुक पल देखने को मिला। व्हीलचेयर पर पहुंचीं रूपी सोरेन को देखकर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू स्वयं मंच से नीचे उतरीं और उनके पास जाकर शिबू सोरेन का पद्म भूषण सम्मान सौंपा। इस दृश्य ने समारोह में मौजूद लोगों को भावुक कर दिया।
इस अवसर पर झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की पत्नी कल्पना सोरेन भी मौजूद रहीं।
झामुमो ने जताई खुशी
शिबू सोरेन को पद्म भूषण मिलने पर झारखंड मुक्ति मोर्चा ने खुशी जाहिर की। पार्टी प्रवक्ता मनोज पांडे ने कहा कि यह पूरे झारखंड के लिए गर्व का क्षण है। उन्होंने कहा कि शिबू सोरेन केवल एक नेता नहीं, बल्कि एक विचार और एक संस्था थे।
उन्होंने केंद्र सरकार से मांग की कि शिबू सोरेन के संघर्ष और योगदान को देश के शैक्षणिक पाठ्यक्रम में शामिल किया जाए, ताकि आने वाली पीढ़ियां उनके जीवन से प्रेरणा ले सकें।
कैसे बने ‘गुरुजी’
शिबू सोरेन का जन्म 11 जनवरी 1944 को तत्कालीन बिहार के रामगढ़ जिले के नेमरा गांव में हुआ था। उनके पिता सोबरन सोरेन महाजनी शोषण के खिलाफ आवाज उठाते थे। पिता की हत्या के बाद शिबू सोरेन ने आदिवासियों के अधिकारों के लिए संघर्ष का रास्ता चुना।
1970 के दशक में उन्होंने संथाल परगना और उत्तरी छोटानागपुर क्षेत्र में महाजनी प्रथा, जमीन हड़पने और आदिवासियों के शोषण के खिलाफ आंदोलन शुरू किया।
‘धानकटनी आंदोलन’ के जरिए उन्होंने आदिवासी किसानों को उनकी जमीन वापस दिलाने की मुहिम चलाई। टुंडी क्षेत्र में उन्होंने रात्रि पाठशालाएं भी चलाईं, जहां लोगों को शिक्षा और सामाजिक जागरूकता का संदेश दिया जाता था। इसी कारण लोग उन्हें प्यार से ‘गुरुजी’ कहने लगे।
झारखंड आंदोलन के सबसे बड़े चेहरे
वर्ष 1972 में झारखंड मुक्ति मोर्चा के गठन के बाद शिबू सोरेन अलग झारखंड राज्य आंदोलन के सबसे प्रमुख नेताओं में शामिल हो गए। उनके लंबे संघर्ष के बाद 15 नवंबर 2000 को झारखंड अलग राज्य बना।
शिबू सोरेन तीन बार झारखंड के मुख्यमंत्री रहे। वे कई बार दुमका लोकसभा क्षेत्र से सांसद चुने गए और केंद्र सरकार में कोयला मंत्री की जिम्मेदारी भी संभाली।

