नई शिक्षा नीति के तहत तैयार की गई एनसीईआरटी की 9वीं कक्षा की नई सामाजिक विज्ञान की पुस्तक में संविधान की प्रस्तावना को शामिल नहीं किया गया है। इसके साथ ही संविधान की प्रस्तावना में प्रयुक्त ‘समाजवादी (Socialist)’ और ‘पंथनिरपेक्ष (Secular)’ जैसे शब्दों का भी इस अध्याय में उल्लेख नहीं है। वहीं पुस्तक में आपातकाल (Emergency) पर एक अलग अध्याय जोड़ा गया है, जिसमें इसे भारतीय लोकतंत्र के सामने आई सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक बताया गया है।
पुस्तक के ‘Understanding Society: India and Beyond’ अध्याय में संविधान की चर्चा उसके निर्माण, लोकतांत्रिक संस्थाओं और मौलिक अधिकारों के संदर्भ में की गई है। हालांकि, इसमें संप्रभु, समाजवादी, पंथनिरपेक्ष, लोकतांत्रिक और गणराज्य जैसे संवैधानिक शब्दों की अलग से व्याख्या नहीं दी गई है।
लोकनायक जयप्रकाश नारायण की भूमिका को प्रमुखता
नई पुस्तक में लोकनायक जयप्रकाश नारायण की भूमिका का विस्तृत उल्लेख किया गया है। इसमें बताया गया है कि 1977 में आपातकाल समाप्त होने के बाद हुए आम चुनाव में जनता ने मतदान के माध्यम से अपनी राय व्यक्त की और तत्कालीन सत्तारूढ़ सरकार को सत्ता से बाहर कर दिया। पुस्तक इसे भारतीय लोकतंत्र की मजबूती का उदाहरण बताती है।
इसके अलावा पुस्तक में यह भी उल्लेख है कि जयप्रकाश नारायण ने छात्रों के समर्थन से आपातकाल के विरोध में व्यापक आंदोलन शुरू किया, जिसका प्रभाव देश के कई राज्यों तक देखने को मिला।
हटाए गए संवैधानिक शब्दों का अर्थ
पुस्तक में जिन शब्दों की अलग से व्याख्या नहीं की गई है, उनमें संप्रभु, समाजवादी, पंथनिरपेक्ष, लोकतांत्रिक और गणराज्य शामिल हैं।
- संप्रभु का अर्थ है कि भारत पूरी तरह स्वतंत्र है और अपने सभी निर्णय स्वयं लेने के लिए सक्षम है।
- समाजवादी का आशय समाज में समान अवसर और सामाजिक-आर्थिक समानता को बढ़ावा देना है।
- पंथनिरपेक्ष (धर्मनिरपेक्ष) का मतलब है कि राज्य का कोई आधिकारिक धर्म नहीं होता और सभी धर्मों के साथ समान व्यवहार किया जाता है।
- लोकतांत्रिक का अर्थ है कि देश की सर्वोच्च शक्ति जनता में निहित होती है, जो चुनाव के माध्यम से अपनी सरकार चुनती है।
- गणराज्य का मतलब है कि देश का सर्वोच्च संवैधानिक पद वंशानुगत नहीं होता, बल्कि निर्धारित संवैधानिक प्रक्रिया के तहत चुना जाता है।
आपातकाल पर क्या कहा गया
नई पुस्तक में आपातकाल का उल्लेख करते हुए लिखा गया है कि 1970 के दशक की शुरुआत में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की सरकार के खिलाफ बेरोजगारी, महंगाई और कुप्रबंधन जैसे मुद्दों को लेकर असंतोष बढ़ने लगा था। पुस्तक के अनुसार जून 1975 में आंतरिक अशांति का हवाला देते हुए देश में आपातकाल लागू किया गया था।

