बिजनेस डेस्क: भारत की ACME Group की इकाई ACME Green Molecules ने जापान की Mitsubishi Gas Chemical Company (MGC) के साथ ग्रीन मेथनॉल की दीर्घकालिक आपूर्ति के लिए एक बाध्यकारी खरीद एवं बिक्री समझौते (Purchase and Sale Agreement) पर हस्ताक्षर किए हैं। इस समझौते के तहत ACME हर वर्ष 1 लाख टन (100,000 TPA) ग्रीन मेथनॉल की आपूर्ति करेगी।
कंपनियों के अनुसार इस समझौते का अनुमानित मूल्य लगभग 1 अरब अमेरिकी डॉलर (USD 1 Billion) है। इसे किसी भारतीय कंपनी द्वारा किया गया पहला RFNBO (Renewable Fuels of Non-Biological Origin) मानकों के अनुरूप ग्रीन मरीन फ्यूल समझौता बताया जा रहा है।
समुद्री ईंधन के लिए बेहतर विकल्प बनेगा ग्रीन मेथनॉल
कंपनियों का कहना है कि ग्रीन मेथनॉल मौजूदा जहाजों और बंदरगाहों के बुनियादी ढांचे के साथ मामूली बदलावों के बाद आसानी से इस्तेमाल किया जा सकता है।
पारंपरिक समुद्री ईंधन जैसे हेवी फ्यूल ऑयल (HFO), वेरी लो सल्फर फ्यूल ऑयल (VLSFO) और मरीन गैस ऑयल (MGO) की तुलना में ग्रीन मेथनॉल पूरे जीवनचक्र में कम कार्बन डाइऑक्साइड (CO₂) उत्सर्जन करता है, जिससे यह पर्यावरण के लिए अधिक अनुकूल विकल्प माना जाता है।
यूरोपीय संघ और IMO के मानकों का करेगा पालन
समझौते के तहत आपूर्ति किया जाने वाला ग्रीन मेथनॉल यूरोपीय संघ (EU) के मौजूदा नियमों और अंतरराष्ट्रीय समुद्री संगठन (IMO) के भविष्य के कार्बन उत्सर्जन संबंधी मानकों के अनुरूप होगा। इससे वैश्विक स्तर पर स्वच्छ समुद्री ईंधन को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
ओडिशा बन रहा ACME का ग्रीन एनर्जी हब
ACME Group के लिए ओडिशा ग्रीन एनर्जी परियोजनाओं का प्रमुख केंद्र बनकर उभर रहा है। कंपनी का पारादीप प्रोजेक्ट राज्य में उसका तीसरा बड़ा निवेश है।
इससे पहले समूह ने जापान की IHI Corporation के साथ संयुक्त उद्यम में गोपालपुर में 4.05 लाख टन प्रति वर्ष (405,000 TPA) क्षमता का ग्रीन अमोनिया संयंत्र स्थापित करने की पहल की थी।
इसके अलावा पारादीप में 8 लाख टन प्रति वर्ष (800,000 TPA) क्षमता वाले ग्रीन अमोनिया संयंत्र की भी योजना पर काम चल रहा है। इस परियोजना को Solar Energy Corporation of India (SECI) के साथ हुए ग्रीन अमोनिया खरीद समझौते का समर्थन प्राप्त है, जिसके तहत भारत के उर्वरक क्षेत्र के लिए आपूर्ति की जाएगी।

