रांची। झारखंड में माध्यमिक शिक्षा को मजबूत बनाने की दिशा में राज्य सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने 765 विद्यालयों को प्लस टू स्तर तक अपग्रेड करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। इन स्कूलों में अगले शैक्षणिक सत्र से 11वीं और 12वीं की पढ़ाई शुरू करने की तैयारी की जा रही है।
स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग ने उन विद्यालयों को प्राथमिकता दी है, जहां कम से कम एक एकड़ जमीन उपलब्ध है और आसपास प्लस टू विद्यालय की सुविधा नहीं है। चयनित स्कूलों में 449 हाई स्कूल और 316 मध्य विद्यालय शामिल हैं।
जिलों से विद्यालयों के उन्नयन के लिए प्रस्ताव मांगे गए थे, जिसके बाद कुल 3334 विद्यालयों के नाम विभाग को भेजे गए। इनमें से 765 विद्यालयों का चयन किया गया।
इन आधारों पर हुआ स्कूलों का चयन
- जिन पंचायतों में प्लस टू विद्यालय नहीं हैं।
- ऐसे मध्य विद्यालय और हाई स्कूल जहां कम से कम एक एकड़ जमीन उपलब्ध है।
- नगर निकाय के उन वार्डों में जहां प्लस टू स्कूल नहीं हैं।
- पहाड़, जंगल, नदी और दुर्गम क्षेत्रों के ऐसे स्कूल जहां छात्रों को पढ़ाई के लिए लंबी दूरी तय करनी पड़ती है।
अपग्रेड होने वाले विद्यालय
पंचायत क्षेत्र
- उच्च विद्यालय – 361
- मध्य विद्यालय – 295
नगर पालिका क्षेत्र
- उच्च विद्यालय – 53
- मध्य विद्यालय – 41
दुर्गम भौगोलिक क्षेत्र
- उच्च विद्यालय – 15
- मध्य विद्यालय – 0
क्यों लिया गया यह फैसला?
राज्य में प्रति एक लाख आबादी पर लगभग 106 प्राथमिक और मध्य विद्यालय हैं, जबकि हाई स्कूल और प्लस टू विद्यालयों की संख्या केवल 8 है। प्राथमिक स्तर की तुलना में माध्यमिक स्तर पर छात्रों के स्कूल छोड़ने की दर भी अधिक है।
नई शिक्षा नीति (एनईपी) के तहत प्रत्येक हाई स्कूल में कक्षा 9वीं से 12वीं तक की पढ़ाई की व्यवस्था करने का लक्ष्य रखा गया है। इसी उद्देश्य से विद्यालयों को अपग्रेड किया जा रहा है।
शिक्षकों के नए पद होंगे सृजित
इन विद्यालयों में प्रधानाध्यापक सहित 12 पद सृजित किए जाएंगे। इसके अलावा छात्र संख्या के आधार पर विभिन्न विषयों के लिए 13 अतिरिक्त शिक्षकों के पद भी बनाए जाएंगे, ताकि विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिल सके।

