भारत में अमेरिका के राजदूत सर्जियो गोर ने समाचार एजेंसी IANS को दिए एक विशेष साक्षात्कार में कहा है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप 2027 की शुरुआत में भारत का दौरा करेंगे। यह यात्रा ऐसे समय प्रस्तावित है जब भारत और अमेरिका लंबे समय से लंबित व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने के साथ-साथ ऊर्जा, रक्षा और प्रौद्योगिकी जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में सहयोग को और मजबूत करने की दिशा में काम कर रहे हैं।
यह ट्रंप का भारतीय आयात पर अमेरिका द्वारा 50 प्रतिशत से अधिक शुल्क लगाए जाने के बाद भारत का पहला प्रस्तावित दौरा माना जा रहा है। दोनों देशों के बीच व्यापारिक मतभेदों के बावजूद राजनयिक स्तर पर संबंधों को मजबूत करने की कोशिशें जारी हैं।
ट्रंप की यात्रा की तैयारियां शुरू
सर्जियो गोर ने बताया कि भारत के छह महीने के दौरे के बाद वह वाशिंगटन लौटे हैं और राष्ट्रपति ट्रंप की भारत यात्रा की तैयारियां पहले ही शुरू हो चुकी हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच व्यक्तिगत संबंध दोनों देशों के सहयोग की मजबूत नींव हैं।
उन्होंने यह भी संकेत दिया कि अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो भी द्विपक्षीय एजेंडे को आगे बढ़ाने में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। गोर ने कहा कि अमेरिका भारत के साथ अपनी रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने के लिए लगातार प्रयास कर रहा है।
व्यापार समझौता अंतिम चरण में
सर्जियो गोर ने कहा कि भारत-अमेरिका व्यापार समझौता अब अपने अंतिम चरण में पहुंच चुका है। दोनों देश फिलहाल समझौते की भाषा और अंतिम शर्तों पर काम कर रहे हैं।
उन्होंने बताया कि IANS से बातचीत से 48 घंटे पहले वह नई दिल्ली में थे, जहां उन्होंने केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक की। गोर के अनुसार ये बैठकें सकारात्मक और उपयोगी रहीं।
उन्होंने कहा कि अभी कुछ मुद्दों पर सहमति बनना बाकी है, जिनमें मुख्य रूप से समझौते की अंतिम भाषा शामिल है। उनका विश्वास है कि आने वाले कुछ सप्ताह या महीनों में इस प्रक्रिया को पूरा कर लिया जाएगा।
जी7 बैठक के बाद तेज हुई बातचीत
यह बयान फ्रांस में आयोजित जी7 शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की मुलाकात के कुछ सप्ताह बाद आया है। गोर ने इस बैठक को “सौहार्दपूर्ण और व्यापक” बताया। दोनों नेताओं के बीच एक घंटे से अधिक समय तक चली चर्चा में व्यापार, रक्षा और अन्य द्विपक्षीय मुद्दों पर विस्तार से बातचीत हुई।
जब व्यापार समझौते में हो रही देरी को लेकर सवाल पूछा गया, तो गोर ने यूरोपीय संघ के साथ हुए समझौतों का उदाहरण देते हुए कहा कि इस तरह के व्यापक समझौतों में समय लगना सामान्य बात है।

