झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) परीक्षा में कथित अनियमितताओं और पेपर लीक के आरोपों को लेकर अभ्यर्थियों का आंदोलन लगातार तेज होता जा रहा है। राजधानी रांची स्थित जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में हजारों छात्र पिछले 12 दिनों से अनिश्चितकालीन धरने पर बैठे हैं। अभ्यर्थियों का कहना है कि परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित होने और उनकी मांगों पर ठोस कार्रवाई होने तक आंदोलन जारी रहेगा।
धरना स्थल पर मूलभूत सुविधाओं की कमी का आरोप
प्रदर्शन कर रहे छात्रों का आरोप है कि भीषण गर्मी और कठिन परिस्थितियों के बावजूद वे लगातार धरना दे रहे हैं, लेकिन धरना स्थल पर उन्हें पीने का पानी, भोजन और शौचालय जैसी बुनियादी सुविधाएं भी उपलब्ध नहीं कराई गई हैं। अभ्यर्थियों का कहना है कि इस कारण उन्हें काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
सरकार पर विपक्ष के नेताओं ने साधा निशाना
रांची से सांसद और केंद्रीय रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ ने आंदोलन को लेकर राज्य सरकार की आलोचना करते हुए आरोप लगाया कि अब तक सरकार का कोई प्रतिनिधि प्रदर्शनकारी छात्रों से मिलने नहीं पहुंचा है। उन्होंने इसे सरकार की संवेदनहीनता बताया।
वहीं गोड्डा सांसद निशिकांत दुबे ने भी सरकार पर निशाना साधते हुए भर्ती प्रक्रिया को लेकर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि परीक्षा में सीटों की खरीद-फरोख्त हुई और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की।
पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा का बयान
पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा ने भी प्रदर्शन कर रहे छात्रों का समर्थन करते हुए कहा कि युवाओं के अधिकारों की लड़ाई केवल रांची तक सीमित नहीं रहेगी। उन्होंने कहा कि अभ्यर्थियों की समस्याओं का समाधान जल्द किया जाना चाहिए।
मांगों पर अड़े छात्र
अभ्यर्थियों का कहना है कि कथित पेपर लीक, परीक्षा में अनियमितताओं और धरना स्थल पर सुविधाओं की कमी के बावजूद उनका आंदोलन जारी रहेगा। अब सभी की नजर इस बात पर है कि राज्य सरकार और प्रशासन छात्रों की मांगों पर कब और क्या निर्णय लेते हैं।

